Mera Gamm

Blog Archive

  • ▼  2012 (5)
    • ▼  August (5)
      • के सुबह सुबह तेरे घर का जो दरबाजा खुला देखा..तू द...
      • अंदाज़ -ए- बफा इश्क में कोई सीखे उनसे....मार के प...
      • कुछ साल लगे लिखने में कुछ देने की सोच में बिता दि...
      • मिन्जों प्यार तेरे दा सहारा जे मिली गया हुंदा.तां...
      • मेरी आखों से फूट पड़ता है तेरे प्यार का सैलाब,मुझ...
  • ►  2007 (1)
    • ►  May (1)

About Me

Unknown
View my complete profile

Monday, August 6, 2012

अंदाज़ -ए- बफा इश्क में कोई सीखे उनसे....
मार के पत्थर वो मरहम लगाने आते हैं..
तूफान को रास्ता मेरे घर का बताके...
वो मेरे अजीज मेरे घर सजाने आते हैं..अश्वनी भारद्वाज
Posted by Unknown at 11:38 PM

No comments:

Post a Comment

Newer Post Older Post Home
Subscribe to: Post Comments (Atom)