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Monday, August 6, 2012

के सुबह सुबह तेरे घर का जो दरबाजा खुला देखा..
तू दिखी इक नज़र के तीर्थों के दर्शन हो गये ....अश्वनी भारद्वाज
Posted by Unknown at 11:39 PM

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